हज़रत दीवाना शाह


चित्तौड़गढ़ नगर से 40 किमी. पश्चिम में ’कपासन’ नगर इसी नाम के उपखण्ड़, तहसील तथा पंचायत समिति का मुख्यालय है। यह नगर 24°53‘ उत्तरी अक्षांश व 74°19‘ पूर्वी देशांतर पर स्थित है और चित्तौड़गढ़-उदयपुर स्टेट हाइवे नम्बर 9 पर है। कभी यह नगर कपासन का एक समृद्ध व्यापारिक केन्द्र हुआ करता था। कहते हैं कि कपास और सण का उत्पादन एवं व्यवसाय यहां अधिक होने से ही इस नगर का नाम कपासन पड़ा। कपासन में एक पुराना गढ़ भी है जिसमें अब स्कूल चलता है। शहर से रेल्वे स्टेशन मार्ग पर करीब डेढ़ किमी. दूर प्रख्यात सूफी संत हजरत दिवाने शाह की दरगाह कपासन की प्रमुख पहचान है। कोई कपासन आए, और बाबा दीवाना शाह की दरगाह पर न जाए, ऐसा हो ही नहीं सकता। दरगाह के बुलंद दरवाजे की गगनचुंबी मीनारें दूर से ही दिखाई देती हैं। बुलंद दरवाजे की भव्यता ऐसी कि देखने वाला देखता ही रह जाए। बाबा दीवाना शाह की यह दरगाह हिन्दु-मुस्लिम को एक सूत्र में बांधती हुई कौमी एकता एवंं भाईचारे की मिसाल कायम करती है। लगभग 30 बीघा क्षेत्र में बनी इस दरगाह परिसर में कुआं, नलकूप, बगीचा व मस्जिद के अतिरिक्त करीब 50 कमरे बने हुए हैं। उर्स के दौरान यहां आने वाले जायरीनों को निःशुल्क आवास, पानी, रोशनी आदि की सुविधा प्रदान की जाती है। दरगाह प्रांगण में विशाल महफिल खाना बना हुआ है। बाबा दीवाना शाह का असली नाम अब्दुल रज्जाक था। लोग प्रेम से इन्हें कालू कहकर भी पुकारते थे। गुजरात के डीसा छावनी पालनपुर स्टेट के राजपुरा गांव में अब्दुल कादर साब के घर में जन्मा यह बालक पढ़ना-लिखना छोड़कर कुदरत के करिश्मों पर चिंतन करने लगा। दुनिया में कौन किसका साथी है, धरती ने जिसको जन्म दिया वह उसे एक दिन अपने पेट में समा लेगी। इस तरह के विचारों से प्रभावित हो अपने वतन डीसा को अंतिम प्रणाम करके यह डीसा से शिवगंज होते हुए अजमेर शरीफ पहुंचे लेकिन मन में शांति नहीं मिलने से अजमेर से सोजत रोड़ चले गए। कुछ दिनों इधर-उधर भ्रमण करने के बाद देवगढ़ (मदारिया) चले गये। उन दिनों देवगढ़ में बहुत बड़े साधक संत कुतुब अली शाह बिराजते थे। कुछ समय तक वे वहां ठहरे। कुतुब अली शाह पहुंचे हुए संत थे जिनके उपदेशों से इनके बैचेन मन को शांति मिली और दीवाना शाह ने कुतुब अली शाह को अपना गुरू बना लिया।

जीवन परिचय हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ.


पैदाईश (जन्म) :- 25 मोहरर्म 1292 हिजरी 4 मार्च 1875 ईस्वी जुमेरात को (गुरूवार) डीसा छावनी, पालनपुरा गुजरात।

आपके वालिद (पिता) :- जनाब अब्दुल कादिर साहब कुरेशी

आपकी वालिदा (माता) :- मोहतरमा जेनब बी साहिबा।

आपका पैदाईशी नाम :- अब्र्दुरज्जाक कुरेशी

तरीकत का नाम :- विलायत अली शाह

तखल्लुस (उपनाम) :- दीवाना (आप दीवाना शाह के नाम से मशहुर हुवें)

तालीम (शिक्षा) :- हिन्दी, गुजराती, अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी।

सिलसिला (चिश्तिया) :- पीरे कामिल महबूब अलीशाह साहब चिश्ती र.अ. देवगढ़

सिलसिला (रफाईया) :- हजरत उल्फत अलीशाह रफाई उर्फ कड़क अली शाह सा.र.अ.

बडनगर (एम.पी.)

विसाल (इंतकाल) :- 3 फरवरी 1944 ई. 8 सफर 1363 हिजरी शबे जुमेरात बवक्त 3.30 बजे।